गज़ल
स्वाभिमान की गज़ल
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जो स्वाभिमानी है, उसका अलग असर होता है,
तूफ़ान में भी ऊँचा हमेशा उसका ही सर होता है।
1- झुकते नहीं जो चंद टुकड़ों की ख़ातिर कभी यहाँ,
दुनिया में बस उन्हीं के पास सच्चा जिगर होता है।
2- काँटों भरी राहों पर भी वो हँसकर गुज़र जाते हैं,
ख़ुद्दारी की राह का ऐसा ही कड़ा सफ़र होता है।
3- दौलत और शोहरत से नहीं नापा जाता कभी सम्मान,
किरदार को बचाए रखना “अजय”सबसे बड़ा हुनर होता है।
– आचार्य डॉ अजय दीक्षित

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