गज़ल
स्वाभिमान ही पहचान है
मिले जो भीख में हमको, वो ऊँचा नाम क्या रखना,
अगर जीना है दुनिया में, तो स्वाभिमान रखना।
1- किसी के रहमो-करम पर जो महलों का सुख दे दे,
उससे बेहतर है टूटे झोपड़े की शान रखना।
2- सफ़र में मुश्किलें आएँ तो तन्हा ही कदम रखना,
मगर हर हाल में अपने ही दिल का ईमान रखना।
3- ज़माने की इस महफ़िल में तमाशा बन नहीं जाना,
भीड़ में खो न जाए, अपनी वो पहचान रखना।
4- कटे सर पर न झुके सर कभी जो ज़ुल्म के आगे,
दिखा दे जो ज़माने को, वही “अजय”आन रखना।
-आचार्य डॉ अजय दीक्षित

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे अन्य गीत –
Related posts:
स्वाभिमान की गज़ल -आचार्य डॉ अजय दीक्षित
स्वाभिमान पर शायरी
Hanuman Jayanti Ki Shubhkamnae
अमित राज श्रीवास्तव की ग़ज़लों से 10 बेहतरीन शायरी
Happy Nag Panchami Shayari Images
ग़ज़ल - इक लगन तिरे शहर में जाने की लगी हुई थी
ग़ज़ल - तो देखते (To Dekhte) - अमित राज श्रीवास्तव 'अर्श'
पुष्प वाटिका में सीया राम - मनीष नंदवाना 'चित्रकार'
सुनो तो मुझे भी ज़रा तुम -अमित राज श्रीवास्तव
ग़ज़ल - इश्क़ से गर यूँ डर गए होते
