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Ganesh Chaturthi 2019

Ganesh Chaturthi 2019 – शुभ मुहूर्त, व्रत कथा और पूजन विधि

Posted on August 28, 2019August 28, 2019 by Pankaj Goyal

Ganesh Chaturthi 2019 Vrat Katha & Pujan Vidhi In Hindi, Ganesh Chaturthi 2019 Shubh Muhurat, Date & Time – धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का अवतरण हुआ था। इसी कारण इस दिन को गणेश चतुर्थी के रुप में मनाया जाता है। 2019 में गणेश चतुर्थी का पर्व 2 सितम्बर को है। गणेश जी का यह जन्मोत्सव चतुर्थी तिथि से लेकर दस दिनों तक चलता है। अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की प्रतिमा विसर्जन के साथ यह उत्सव संपन्न होता है।

यह भी पढ़े – गणेश चतुर्थी के उपाय | Ganesh Chaturthi Ke Upay

Ganesh Chaturthi 2019

गणेश चतुर्थी 2019 शुभ मुहूर्त | Ganesh Chaturthi 2109 Shubh Muhurat – 

  • गणेश चतुर्थी 2019 – 2 सितंबर
  • मध्याह्न गणेश पूजा – 11:05 से 13:36
  • चंद्र दर्शन से बचने का समय- 08:55 से 21:05 (2 सितंबर 2019)
  • चतुर्थी तिथि आरंभ- 04:56 (2 सितंबर 2019)
  • चतुर्थी तिथि समाप्त- 01:53 (3 सितंबर 2019)

गणेश चतुर्थी व्रत कथा | Ganesh Chaturthi 2019 Vrat Katha In Hindi

एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती नर्मदा नदी के निकट बैठे थे। वहां देवी पार्वती ने भगवान भोलेनाथ से समय व्यतीत करने के लिये चौपड खेलने को कहा। भगवान शंकर चौपड खेलने के लिये तो तैयार हो गये। परन्तु इस खेल मे हार-जीत का फैसला कौन करेगा?

इसका प्रश्न उठा, इसके जवाब में भगवान भोलेनाथ ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका पुतला बनाया, उस पुतले की प्राण प्रतिष्ठा कर दी और पुतले से कहा कि बेटा हम चौपड खेलना चाहते है। परन्तु हमारी हार-जीत का फैसला करने वाला कोई नहीं है। इसलिये तुम बताना की हम में से कौन हारा और कौन जीता।

यह कहने के बाद चौपड का खेल शुरु हो गया। खेल तीन बार खेला गया और संयोग से तीनों बार पार्वती जी जीत गईं। खेल के समाप्त होने पर बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिये कहा गया, तो बालक ने महादेव को विजयी बताया। यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गई। और उन्होंने क्रोध में आकर बालक को लंगडा होने व किचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता से माफी मांगी और कहा की मुझसे अज्ञानता वश ऐसा हुआ, मैनें किसी द्वेष में ऐसा नहीं किया। बालक के क्षमा मांगने पर माता ने कहा की, यहां गणेश पूजन के लिये नाग कन्याएं आएंगी, उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऐसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगे, यह कहकर माता, भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गई।

एक वर्ष बाद उस स्थान पर नाग कन्याएं आईं। नाग कन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालुम करने पर उस बालक ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया। उसकी श्रद्धा देखकर गणेश जी प्रसन्न हो गए। और श्री गणेश ने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिये कहा। बालक ने कहा कि, हे विनायक मुझमें इतनी शक्ति दीजिए, कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वो यह देख प्रसन्न हों।

बालक को यह वरदान दे, श्री गणेश अन्तर्धान हो गए। बालक इसके बाद कैलाश पर्वत पर पहुंच गया। और अपने कैलाश पर्वत पर पहुंचने की कथा उसने भगवान महादेव को सुनाई। उस दिन से पार्वती जी शिवजी से विमुख हो गईं। देवी के रुष्ठ होने पर भगवान शंकर ने भी बालक के बताये अनुसार श्री गणेश का व्रत 21 दिनों तक किया। इसके प्रभाव से माता के मन से भगवान भोलेनाथ के लिये जो नाराजगी थी वो स्वयं समाप्त हो गई।

पार्वती जी के मन में स्वयं महादेवजी से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई। वे शीघ्र ही कैलाश पर्वत पर आ पहुँची। वहाँ पहुँचकर पार्वतीजी ने शिवजी से पूछा- भगवन! आपने ऐसा कौन-सा उपाय किया जिसके फलस्वरूप मैं आपके पास भागी-भागी आ गई हूँ। शिवजी ने ‘गणेश व्रत’ का इतिहास उनसे कह दिया।

यह व्रत विधि भगवन शंकर ने माता पार्वती को बताई। यह सुन माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई। माता ने भी 21 दिन तक श्री गणेश व्रत किया और दुर्वा, पुष्प और लड्डूओं से श्री गणेश जी का पूजन किया। व्रत के 21 वें दिन कार्तिकेय स्वयं पार्वती जी से आ मिलें। कार्तिकेय ने यही व्रत विश्वामित्रजी को बताया। विश्वामित्रजी ने व्रत करके गणेशजी से जन्म से मुक्त होकर ‘ब्रह्म-ऋषि’ होने का वर माँगा। गणेशजी ने उनकी मनोकामना पूर्ण की। इस प्रकार श्री गणेशजी चतुर्थी व्रत को मनोकामना व्रत भी कहा जाता है। इस व्रत को करने से वो सबकी मनोकामना पूरी करते है।

इस तरह पूजन करने से भगवान श्रीगणेश अति प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करते हैं।

गणेश चतुर्थी पूजा विधि | Ganesh Chaturthi 2019 Puja Vidhi

1. सर्वप्रथम घर के मंदिर में या फिर किसी स्वच्छ और पवित्र जगह श्री गणेश की स्थापना करे। गणेश जी के स्थान के उलटे हाथ की तरफ जल से भरा हुआ कलश चावल या गेहूं के ऊपर स्थापित करे। धूप व अगरबत्ती लगाएं। कलश के मुख पर मौली बांधें एवं आमपत्र के साथ एक नारियल उसके मुख पर रखें। ध्यान रहे कि नारियल की जटाएं ऊपर की ओर ही रहे। गणेश जी के स्थान के सीधे हाथ की तरफ घी का दीपक एवं दक्षिणावर्ती शंख रखना चाहिए। सुपारी गणेश भी रखें।

2. पूजन की शुरुआत में हाथ में अक्षत, जल एवं पुष्प लेकर स्वस्तिवाचन, गणेश ध्यान एवं समस्त देवताओं का स्मरण करें।

3. अब अक्षत एवं पुष्प चौकी पर समर्पित करें। इसके पश्चात एक सुपारी में मौली लपेटकर चौकी पर थोड़े-से अक्षत रख उस पर वह सुपारी स्थापित करें।

4. भगवान गणेश का आह्वान करें। गणेश आह्वान के बाद कलश पूजन करें।

5. कलश उत्तर-पूर्व दिशा या चौकी की बाईं ओर स्थापित करें। कलश पूजन के बाद दीप पूजन करें।

6. इसके बाद पंचोपचार या षोडषोपचार के द्वारा गणेश पूजन करें. षोडषोपचार पूजन इस प्रकार होता है

  • सबसे पहले आह्वान करते हैं।
  • इसके बाद स्थान ग्रहण कराते हैं।
  • हाथ में जल लेकर मंत्र पढ़ते हुए प्रभु के चरणों में अर्पित करते हैं।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देने की तरह पानी छोड़ें।
  • मंत्र पढ़ते हुए 3 बार जल चढ़ाएं।
  • पान के पत्ते या दूर्वा से पानी लेकर छींटें मारें।
  • सिलेसिलाए वस्त्र, पीताम्बरी कपड़ा या कलावा चढ़ाएं।
  • जनेऊ, हार, मालाएं, पगड़ी आदि चढ़ाएं।
  • इत्र छिड़कें या चंदन अर्पित करें. फूल, धूप, दीप, पान के पत्ते पर फल, मिठाई, मेवे आदि चढ़ाएं।

7. परंपरागत पूजन करें और आरती करें।

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