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Upang Lalita Panchami Vrat Katha

उपांग ललिता पंचमी व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व

Posted on October 8, 2018 by Pankaj Goyal

Upang Lalita Panchami Vrat Katha | हिन्दू पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि के आश्विन शुक्‍ल पंचमी को ललिता पंचमी पर्व या उपांग ललिता पर्व मनाया जाता है। यह पर्व शक्तिस्वरूपा देवी ललिता को समर्पित है। ललिता देवी को माता सती पार्वती का ही एक रूप माना जाता हैं। यह पर्व पूरे भारतभर में मनाया जाता है। इस सुअवसर पर भक्तजन व्रत रखते हैं जिसे ललिता पंचमी व्रत या उपांग ललिता व्रत के नाम से जाना जाता है। ललिता देवी को ‘त्रिपुर सुंदरी’ के नाम से भी जाना जाता है।

  • Mahalaxmi Vrat Katha | महालक्ष्मी व्रत कथा | पूजा विधि | उद्यापन विधि

Upang Lalita Panchami Vrat Katha

उपांग ललिता पंचमी व्रत कथा | Upang Lalita Panchami Vrat Katha

पुराणों के अनुसार जब माता सती अपने पिता दक्ष द्वारा अपमान किए जाने पर यज्ञ अग्नि में अपने प्राण त्‍याग देती हैं तब भगवान शिव उनके शरीर को उठाए घूमने लगते हैं, ऐसे में पूरी धरती पर हाहाकार मच जाता है। जब विष्‍णु भगवान अपने सुदर्शन चक्र से माता सती की देह को विभाजित करते हैं, तब भगवान शंकर को हृदय में धारण करने पर इन्हें ‘ललिता’ के नाम से पुकारा जाने लगा।

कालिका पुराण के अनुसार देवी ललिता की दो भुजाएं हैं। यह माता गौर वर्ण होकर रक्तिम कमल पर विराजित हैं। दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को ‘चण्डी’ का स्थान प्राप्त है। इनकी पूजा पद्धति देवी चण्डी के समान ही है।

नवरात्रि में दुर्गा देवी के 9 रूपों की पूजा की जाती है तथा नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता के पूजन के साथ-साथ ललिता पंचमी व्रत तथा शिवशंकर की पूजा भी की जाती है। इस संबंध में ऐसी मान्‍यता है कि मां ललिता 10 महाविद्याओं में से ही एक हैं, अत: पंचमी के दिन यह व्रत रखने से भक्त के सभी कष्‍ट दूर होकर उन्हें मां ललिता का विशेष आशीर्वाद मिलता है। देवी ललिता का ध्यान रूप बहुत ही उज्ज्वल व प्रकाशवान है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता ललिता कामदेव के शरीर की राख से उत्पन्न हुए ‘भांडा’ नामक राक्षस को मारने के लिए प्रकट हुई थीं। इस दिन देवी मंदिरों पर भक्तों का तांता लगता है। यह व्रत समस्त सुखों को प्रदान करने वाला होता है अत: इस दिन मां ललिता की पूजा-आराधना का विशेष महत्व है। इस दिन ललितासहस्रनाम, ललितात्रिशती का पाठ विशेष तौर पर किया किया जाता है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े – भारत के अदभुत मंदिर
सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

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