Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu
Somvati Amavasya Vrat Katha

सोमवती अमावस्या व्रत कथा, व्रत विधि व महत्तव

Posted on April 14, 2018April 18, 2018 by Pankaj Goyal

Somvati Amavasya Vrat Katha, Vrat Vidhi, Pujan Vidhi, Hindi | हिंदी मास के अनुसार हर मास में अमावस्या आती है। लेकिन जब किसी भी माह में सोमवार के दिन अमावस्या तिथि पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। इस दिन के व्रत का महत्त्व हमारे प्राचीन ग्रंथों में भी दिया गया है। विवाहित स्त्री अपने पति की लम्बी आयु के लिये इस दिन व्रत रखती है। यह पितृ दोष के निवारण में भी सहायक है। इस दिन को गंगा स्नान का भी बड़ा महत्व है। जो मनुष्य गंगा स्नान को नहीं जा सकते, वे अपने घर में हीं पानी में गंगा जल मिला कर तीर्थों का आह्वान करते हुए स्नान करें। इस दिन स्नान दान का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन मौन रहकर स्नान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। कुरुक्षेत्र के ब्रह्मा सरोवर में स्नान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

Somvati Amavasya Vrat Katha

सोमवती अमावस्या व्रत पूजन सामग्री | Somvati Amavasya Vrat Pujan Samagri
पुष्प, माला, अक्षत, चंदन, कलश, दीपक, घी, धूप, रोली, भोग, धागा, सिंदूर, चूड़ी/ बिंदी/सुपारी/पान के पत्ते/मूंगफली – 108 की संख्या में

सोमवती अमावस्या व्रत विधि | Somvati Amavasya Vrat Vidhi
सोमवती अमावस्या का व्रत विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लम्बी आयु के लिये करती है । इसे अश्वत्थ (पीपल) प्रदक्षिणा व्रत भी कहते हैं। इस दिन प्रात: काल उठकर नित्य कर्म तथा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहन लें। अब सभी पूजन सामग्री लेकर पीपल के वृक्ष के पास जायें। पीपल की जड़ में लक्ष्मी नारायण की स्थापना करके दूध /जल अर्पित करें । पीपल की जड़ में सूत लपेट दें भगवान का ध्यान करके पुष्प, अक्षत, चन्दन, भोग, धूप इत्यादि अर्पण करें। फिर प्रेमपूर्वक हाथ जोड़कर भगवान की प्रार्थना करें अब पेड़ के चारों ओर “ॐ श्री वासुदेवाय नम: ” बोलते हुए 108 बार परिक्रमा करें। इसके बाद कथा सुनें अथवा सुनाये। सामर्थ्यानुसार दान दें। ऐसा करने से भगवान पुत्र, पौत्र ,धन, धान्य तथा सभी मनोवांछित फल प्रदान करते हैं ।
ध्यान दें – इस दिन मूली और रूई का स्पर्श ना करें ।

सोमवती अमावस्या व्रत कथा | Somvati Amavasya Vrat Katha
एक साहुकार था उसके सात बेटे ,बहु और एक बेटी थी। साहुकार के यहाँ एक जोगी भिक्षा मांगने आता था। जब साहुकार की बहुए जोगी को भिक्षा देती तो वो ले लेता लेकिन जब बेटी भिक्षा देती तो नहीं लेता , कहता कि तू अभागी है तेरे हाथ से भिक्षा नही लूगां। उसकी यह बात सुन-सुनकर बेटी सूखकर कांटा हो गई।

एक दिन उसकी माँ ने पूछा कि “बेटी तुझे अच्छा खाने को मिलता है अच्छा पहनने को मिलता है फिर भी तू सुखकर कांटा हो रही है ! अगर तुझे कोई परेशानी है तो हमें बता “। बेटी बोली माँ हमारे यहां जो जोगी भिक्षा मांगने आता है वो भाभियों से तो भिक्षा ले लेता है पर जब मैं भिक्षा देने जाती हूँ तो कहता है ” कि तू अभागी है ” तेरे हाथ से भिक्षा नही लूगाँ “।

दुसरे दिन जोगी जब भिक्षा लेने आया तो साहुकारनी बोली ” कि एक तो मेरी बेटी तुझे भिक्षा देती है ऊपर से तू उसे ही अभागी कहता है “। जोगी बोला ” कि मैं तो जो इसके भाग्य में लिखा है वो ही कहता हूँ ” तब साहुकारनी बोली कि जब तुझे इतना पता है तो इसको दूर करने का उपाय भी पता होगा । वह बोला ” कि उपाय तो है पर बहुत कठिन है “। वह बोली ” कि तू बता मैं मेरी बेटी के लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ “। तब जोगी बोला ” कि सात समुद्र पार एक सोभा धोबन रहती है । वह सोमवती अमावस्या का व्रत करती है वो ही इसे सुहाग दे सकती है । अन्यथा जब इसकी शादी होगी, तब इसके पति को फेरों में सांप काट लेगा और ये विधवा हो जाएगी। इतना सुनना था कि वह उठी और अपने बेटों को ये बात बताई और साथ चलकर सोभा धोबन को ढूढने के लिए कहा । सबने एक-एककर मना कर दिया तो वह अपनी बेटी को लेकर चल पड़ी सोभा धोबन को ढूढने ।

चलते-चलते वे समुद्र के किनारे तक आ पहुची ।और सोचने लगी की अब आगे कैसे चले , इतना विशाल समुद्र कैसे पर करें । वहां एक बड़ का पेड़ था वही दोनों माँ-बेटी बैठ गई । उस पेड़ के ऊपर एक हंस का जोड़ा रहता था और नीचे पेड़ की जड़ में एक सांप रहता था । जब हंस का जोड़ा दाना चुगने जाता तो सांप हंस के बच्चो को खा जाता था ।हंस उसे देख नहीं पाते थे ।उस दिन भी सांप हंस के बच्चो को खाने के लिए पेड़ पर चढ रहा था कि हंस के बच्चो की आवाज सुनकर माँ-बेटी ने देखा, कि सांप हंस के बच्चो को खाने जा रहा है तो उन्होंने सांप को मार दिया । शाम को जब हंस का जोड़ा आया तो उन्होंने माँ-बेटी को वहा बैठा पाया तो सोचा की ये ही मेरे बच्चो को मार देते है । जैसे ही वे उन माँ-बेटी को मारने को तैयार हुए कि पेड़ पर से बच्चो की आवाज सुनाई दी । तो उन्हों ने देखा की हमारे बच्चे तो जिन्दा है तब बच्चो ने उन्हें सारी बात बताई कि कैसे माँ-बेटी ने उनकी जान बचाई ।

हंस ने उन्हें धन्यवाद दिया और उनका यहाँ आने का कारण पूछा । माँ ने सारी बात बताई और बोली कि हम यहां तक तो आ गए पर समझ में नही आ रहा की आगे कैसे जाये ।तब हंस बोले की आप हमारे ऊपर बैठ जाओ हम आपको समुद्र पार पहुचा देते है ।इस तरह दोनों समुद्र पार पहुच गई ।उसने सोभा धोबन का घर ढूंढ़ लिया ।अब वह सवेरे जल्दी उठकर सोभा धोबन के घर का सारा काम करने लगी खाना बनाना , झाड़ू – पोछा , पानी भरना कपड़े धोना। सोभा धोबन के सात बेटे-बहु थे । उसकी बहुए बहुत काम चोर थी काम को लेकर वे आपस में बहुत झगड़ा करती थी। लेकिन इधर कुछ दिनों से सोभा धोबन देख रही थी कि वे सब बिना झगड़ा किये सारा काम कर लेती है। एक दिन उसने बहुओ से पूछा कि क्या बात है आजकल तुम सब मिलकर ख़ुशी-ख़ुशी सारा काम कर लेती हो और झगड़ा भी नही करती हो ।

इस पर उसकी सब बहुओ ने मना कर दिया की हम तो बहुत दिनों से काम करते ही नहीं है तब उसने सोचा की जब मेरी बहुएँ काम नहीं करती तो फिर कौन हैं जो मेरे घर का काम करता है। ये तो मालूम करना होगा। दुसरे दिन वह सुबह जल्दी उठी और उसने देखा की, एक औरत और एक लड़की घर का सारा काम करके वापस जा रही है। तो उसने उन दोनों को रोका और पुछा “की तुम कौन हो और मेरे घर का काम क्यों कर रही हो “! तब साहुकारनी ने बताया कि ये मेरी लड़की है लकिन इसके भाग्य में सुहाग नहीं है और तुम सोमवती अमावस्या का व्रत व पूजा करती हो ,एक तुम ही हो जो मेरी बेटी को सुहाग दे सकती हो। इसीलिए हम तेरे घर का सारा काम करती है ।

इस पर सोभा धोबन ने कहा कि “ठीक है तुमने इतने दिन मेरे घर का काम किया है, मैं तेरी बेटी को सुहाग जरूर दूँगी, जब तेरी बेटी की शादी तय हो जाये तो उसके पीले चावल समुद्र में डाल देना मैं शादी में पहुचं जाऊँगी ‘। दोनों माँ-बेटी अपने घर आ गई । जब लड़की की शादी तय हुई तो माँ ने समुद्र में पीले चावल डाल दिए।

सोभा धोबन जब अपने घर से रवाना होने लगी तो बोली की मेरे जाने के बाद यदि घर में कुछ भी टूटता-फूटता है उसे जैसा हो वैसा ही रहने देना मेरे आने तक, तुम लोग कुछ भी मत करना।अपने घर वालो को ये हिदायत देकर वह साहुकार की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए रवाना हो गई।

जब साहुकार की बेटी के फेरें हो रहें थे तब सांप ने दुल्हे को डस (काट) लिया। अब सब रोने-धोने लगे तब लड़की की माँ ने सोभा धोबन से कहा “कि आज के दिन के लिए मैंने तेरे यहाँ काम किया था ताकि तू मेरी बेटी को आज सुहाग दे सके “। सोभा धोबन ने कहा ” कि तू चिंता मत कर “। वह उठी दुल्हे के पास गई और अपनी मांग में से सिंदूर लिया, आँख में से काजल और छोटी अँगुली से मेहंदी ली व दुल्हे के छिटे दिये और बोली कि ” आज तक मैंने जो सोमवती अमावस्या की उसका फल साहुकार की बेटी को जाना और आगे जो करू वह मेरे धोबी को जाना “। उसके ऐसे करते ही दुल्हा ठीक हो गया । सब लोग बड़े खुश हो गये।

जब बारात विदा हो गई तो सोभा धोबन जाने लगी ,तब सबने कहा की अभी तो आपको विदा ही नही किया है अभी आप कैसे जा सकती है ।सोभा धोबन ने कहा कि मैं मेरे घर को ऐसे ही छोड़ कर आई थी।पता नही मेरे पीछे से वहा क्या हो रहा है ।आप विदा ही करना चाहते है तो मुझे एक मिट्टी का कलश देदो।

कलश लेकर वह घर के लिए रवाना हो गई ।रास्ते में सोमवती अमावस्या आई ,तो उसने कलश के 108 टुकड़े किए ,पीपल की पूजा की और परिक्रमा करके बोली ” भगवान आज से पहले जो अमावस्या की ,उसका फल साहुकार की बेटी को दिया, आज जो मैंने अमावस्या की उसका फल मेरे पति को देना फिर कलश के टुकड़ो को खड्डा खोदकर गाड दिया और घर के लिए चल दी। उधर घर पर उसका धोबी मर गया। सब धोबन का इन्तजार कर रहे । क्योकि वो कह कर गई थी कि मेरे पीछे से तुम लोग कुछ भी मत करना। जब वह घर पहुची तो देखा की उसका धोबी मरा पड़ा है और सब लोग रो रहे है। उसने कहा कि सब लोग चुप हो जाओ । वह अपने धोबी के पास आई और अपनी मांग में से सिंदूर लिया, आँख में से काजल और छोटी अंगुली में से मेहँदी निकालकर छिटे दिये और बोली भगवान आज से पहले जो अमावस्या की उसका फल साहुकार की बेटी को दिया, आज जो मैंने अमावस्या की उसका फल मेरे पति को देना । ऐसा करते ही उसका पति उठकर बैठ गया ।इतने में ब्राह्मन आया और बोला जजमान अमावस्या का दान दो ,धोबन बोली की मैंने तो पीपल के पेड़ के पास गाड दी, वहा से निकाल लो । ब्राह्मन ने वहा जाकर देखा तो सोने की 108 मोहरे हो गई । पूरे गावँ में ढिंढोरा पिटवा दिया कि सोमवती अमावस्या का व्रत ,पूजा करे व दान दे।

हे सोमवती माता जैसे आपने साहुकार की बेटी को सुहाग दिया और धोबी को जीवन दान दिया वैसे ही सबको देना ।कहते को सुनते को व हुंकारा भरते को । घटती हो तो पूरी करे पूरी हो तो मान रखना भगवान।

अन्य सम्बंधित लेख – 

  • सोमवती अमावस्या के उपाय | Somvati Amavasya Ke Upay
  • शनिश्चरी अमावस्या के उपाय (राशि अनुसार)
  • मौनी अमावस्या को किए जाने वाले तांत्रिक उपाय
  • लाल किताब के 25 अचूक टोटके और उपाय
  • भूत भगाने व प्रेतबाधा मुक्ति के 10 सरल उपाय

Somvati Amavasya Vrat Katha, Somvati Amavasya Ki Kahni,

Related posts:

स्कंद षष्ठी व्रत एवं पूजन विधि | महत्व | भगवान कार्तिकेय का जन्म कथा
मत्स्य जयंती की पौराणिक कथा
गुड़ी पड़वा क्यों, कैसे मनाते है | पौराणिक कथा
नारी गहने क्यों पहनती है? गहनों का महत्व
गोगाजी की जीवनी और गोगा नवमी की कथा
उनाकोटी - 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां, क्या है रहस्य
हरियाली अमावस्या व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व
नागपंचमी की पौराणिक कथाएं
युधिष्ठर को पूर्ण आभास था, कि कलयुग में क्या होगा ?
वरुथिनी एकादशी का महत्व, व्रत विधि एवं व्रत कथा, वरुथिनी एकादशी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/30/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme