Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

धींगा गवर (Dhinga Gavar)- इस उत्सव में लड़कियां करती हैं कुंवारे लड़कों की पिटाई, जिसकी हुई पिटाई उसका ब्याह पक्का

Posted on June 6, 2015August 12, 2016 by Pankaj Goyal

Dhinga Gavar Festival, Jodhpur : आप सब ने बरसाने की प्रसिद्ध बेंतमार होली के बारे में तो सुना ही होगा। आज हम आपको राजस्थान के मारवाड़ प्रान्त खासकर जोधपुर में मनाए जाने वाले इसी तरह के एक उत्सव के बारे में बता रहे है।  इस उत्सव का नाम है ‘धींगा गवर’। इस उत्सव में लड़कियां कुंवारे लड़कों को दौड़ा-दौड़ाकर डंडा मारती हैं। यहां की मान्यता के अनुसार डंडा अगर किसी लड़के पर लगता है तो उसका ब्याह होना पक्का समझा जाता है। इस उत्सव को बेंतमार गणगौर के रूप में जाना जाता है।

Dhinga gavar festival Rajasthan in Hindi

बेंत पड़ी तो ब्याह पक्का

मारवाड़ में लगभग 80-100 वर्ष पहले ये मान्यता थी कि धींगा गवर के दर्शन पुरुष नहीं करते। क्योंकि तत्कालीन समय में ऐसा माना जाता था कि जो भी पुरुष धींगा गवर के दर्शन कर लेता था उसकी मृत्यु हो जाती थी। ऐसे में धींगा गवर की पूजा करने वाली सुहागिनें अपने हाथ में बेंत या डंडा ले कर आधी रात के बाद गवर के साथ निकलती थी। वे पूरे रास्ते गीत गाती हुई और बेंत लेकर उसे फटकारती हुई चलती। बताया जाता है कि महिलाएं डंडा फटकारती थी ताकि पुरुष सावधान हो जाए और गवर के दर्शन करने की बजाय किसी गली, घर या चबूतरी की ओट ले लेते थे। कालांतर में यह मान्यता स्थापित हुई कि जिस युवा पर बेंत (डंडा) की मार पड़ती उसका जल्दी ही विवाह हो जाता। इसी परंपरा के चलते युवा वर्ग इस मेले का अभिन्न हिस्सा बन गया है।

Dhinga gavar festival history in Hindi

सोलह का सलोना संगम

इस त्योहार के साथ सोलह अंक का सुंदर संयोग भी जुड़ा है। धींगा गवर मेला गवर माता की पूजा के सोलहवें दिन मनाया जाता है। तीजणियां सोलह दिन तक उपवास रखती हैं, फिर सोलह शृंगार कर धींगा गवर माता के दर्शन करने निकलती हैं। इस दौरान जो भी महिलाएं सोलह व्रतधारी होती हैं उनकी बांह पर सोलह गांठों वाला पवित्र सूत बंधा होता है, जिसे सोलहवें दिन उतार कर गवर माता की बांह पर इस उद्देश्य से बांध दिया जाता है कि अगले जन्म में वह अखंड सौभाग्यवती हो।

Dhinga gavar festival story in Hindi

धींगा गवर व गवर पूजन अलग-अलग

गवर माता को पार्वती का रूप माना जाता है। ईसर शिव के प्रतीक होते हैं। इसका पूजन सुहागिनें अपने इसी जन्म के भरतार की सुखद दीर्घायु के लिए करती है, जबकि धींगागवर का पूजन अगले जन्म में उत्तम जीवन साथी मिलने की कामना के साथ किया जाता है। धींगा गवर के पूजन में ये भी मान्यता है कि इसी सुहागिनों के साथ साथ कुंवारी कन्याएं और विधवाएं भी कर सकती है। चूंकि पूजा का महात्म्य अगले जन्म के लिए कामना करना होता है, इसलिए कुंवारी कन्याएं भी इसी उद्देश्य से और विधवा महिलाएं भी इस प्रार्थना के साथ पूजा करती हैं।

Dhinga gavar festival Information in Hindi

धींगा गवर कौन

धींगा गवर की पूजा विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में ही की जाती है। जोधपुर, नागौर और बीकानेर में धींगा गवर का उत्सव मनाया जाता है। ऐेतिहासिक तथ्यों के अनुसार ईसर एवं गवर शिव और पार्वती के प्रतीक हैं, जबकि धींगा गवर को ईसर की दूसरी पत्नी के रूप में मान्यता मिली हुई है। किवदंती के अनुसार धींगा गवर मौलिक रूप से एक भीलणी थी, जिसके पति का निधन उसकी यौवनावस्था में ही हो गया था और वो ईसर के नाते आ गई थी। इसलिए धींगा गवर चूंकि विधवा हो गई और उसे ईश्वर की कृपा से पुनः ईसर जैसे पति मिल गए, इसी तथ्य के मद्देनजर विधवाओं को भी इस त्योहार पर पूजन करने की छूट मिल गई थी।

अन्य विचित्र परम्पराएँ

  • काशी के मणिकर्णिका शमशान घाट पर जलती चिताओं के पास पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर, आखिर क्यों ?
  • जवान होने से जुडी खतरनाक, दर्दनाक और विचित्र परम्पराएं
  • भारत की 10 अनोखी परम्परा और मान्यता
  • हिमाचल प्रदेश के किन्नौर में आज भी महिलाएं करती है बहु पति विवाह
  • लाहौल-स्पीति – यहां बहन बनती है दूल्हा, शादी करके घर लाती है अपनी भाभी

Tag- Hindi, Amazing, Bizarre, Dhinga gavar festival, Marwad, Rajasthan, Unique Festival of Jodhpur, Yahn ladkiyan karti hai ladko ki pitai,

Related posts:

नवरात्रि 2021 कलश स्थापना मुहूर्त | जानिये नवरात्रि में क्यों उगाई जाती है जौ और क्या है इस से जुड़े ...
नारी गहने क्यों पहनती है? गहनों का महत्व
हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपन, राशि अनुसार लगाए पौधे, हरियाली अमावस्या पर्व के फायदे
यहाँ औरतें 5 दिन रहती है निर्वस्त्र, जानिये क्यों ?
हक बख्शीश - एक कुप्रथा जिसमें लड़की का विवाह करवाते है कुरान से
Solah Shringar | 16 श्रृंगार | स्त्रियों के लिए क्या है इनका महत्व
ऐसा क्यों - हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद नहाना क्यों जरुरी है?
इस ट्राइब में शादी से पहले संबंध बनाना है जरूरी, बच्चा होने पर ही कर सकते है शादी, जानिए क्यों?
ये हैं दीपावली और माता लक्ष्मी से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं और उनके पीछे छिपा सन्देश
जानिए क्या है कार्तिक स्नान का महत्व, विधि और फायदे

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/17/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme