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अटेर दुर्ग, भिंड- इसके खुनी दरवाज़े से हर समय टपकता था खून

Posted on April 7, 2015August 23, 2016 by Pankaj Goyal

Ater fort Bhind Madhya Pradesh History in Hindi  : अटेर का क़िला, एक विशाल – शानदार, मध्ययुगीन किला है। यह किला चंबल नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है जो अपनी महिमा के साथ – साथ अपनी भव्यता के लिए विख्यात रहा है अटेर का क़िला चम्बल नदी के किनारे एक ऊंचे स्थान पर स्थित है।

Ater fort Bhind Madhya Pradesh History in Hindi

महाभारत में जिस  देवगिरि पहाड़ी का उल्लेख आता है यह किला उसी पहाड़ी पर स्तिथ है। इसका मूल नाम देवगिरि दुर्ग है।

इस किले का निर्माण भदौरिया राजा बदनसिंह ने 1664 ई. में शुरू करवाया था। भदौरिया राजाओं के नाम पर ही भिंड क्षेत्र को पहले ‘बधवार’ कहा जाता था।  गहरी चंबल नदी की घाटी में स्थित यह क़िला भिंड ज़िले से 35 कि.मी. पश्चिम में स्थित है।

Ater fort Bhind Madhya Pradesh Story in Hindi

चंबल नदी के किनारे बना यह दुर्ग भदावर राजाओं के गौरवशाली इतिहास की कहानी बयां करता है। भदावर राजाओं के इतिहास में इस क़िले का बहुत महत्व है। यह हिन्दू और मुग़ल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है।

Khooni darwaza, Ater fort Bhind Madhya Pradesh

‘खूनी दरवाज़ा’, ‘बदन सिंह का महल’, ‘हथियापोर’, ‘राजा का बंगला’, ‘रानी का बंगला’ और ‘बारह खंबा महल’ इस क़िले के मुख्य आकर्षण हैं। लेकिन इस महल की सबसे चर्चित चीज़ है खुनी दरवाज़ा।  भदावर राजाओं की शौर्यगाथाओं के प्रतीक लाल दरवाजे से ऐतिहासिक काल में खून टपकता था, इस खून से तिलक करने के बाद ही गुप्तचर राजा से मिल पाते थे।

Ater fort Bhind Madhya Pradesh Information in Hindi

आज भी इस दरवाजे को लेकर किवदंतिया जिले भर में प्रचलित है। खूनी दरवाजे का रंग भी लाल है। इस पर ऊपर वह स्थान आज भी चिन्हित है जहां से खून टपकता था।

दरवाजे के ऊपर भेड़ का सिर काटकर रखा जाता था: भदावर राजा लाल पत्थर से बने दरवाजे के ऊपर भेड़ का सिर काटकर रख देते थे, दरवाजे के नीचे एक कटोरा रख दिया जाता था। इस बर्तन में खून की बूंदें टपकती रहती थी। गुप्तचर बर्तन में रखे खून से तिलक करके ही राजा से मिलने जाते थे, उसके बाद वह राजपाठ व दुश्मनों से जुड़ी अहम सूचनाएं राजा को देते थे। आम आदमी को किले के दरवाजे से बहने वाले खून के बारे में कोई जानकारी नहीं होती थी।

Ater fort Bhind Madhya Pradesh Information in Hindi

किले के तलघरों को खजाने की चाह में खोदा: चंबल नदी के किनारे बना अटेर दुर्ग के तलघरों को स्थानीय लोगों ने खजाने के चाह मे खोद दिया। अटेर निवासी श्रीराम सिंह का कहना है कि दुर्ग के इतिहास को स्थानीय लोगों ने ही खोद दिया है। इस दुर्ग की दीवारों और जमीन को खजाने की चाह में सैकड़ों लोगों ने खोदा है, जिसकी वजह से दुर्ग की इमारत जर्जर हो गई है।

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Tag- Hindi, News, Information, History, Story, Kahani, Itihas, Ater Fort, Bhind, Madhya Pradesh, Khooni darwaza, Chambal,

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