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प्राचीन विशव के सात आश्चर्य (The Seven Wonder of The Ancient World)

Posted on September 17, 2014April 30, 2016 by Pankaj Goyal

प्राचीन विशव के सात आश्चर्य, प्राचीन विशव की वह सात इमारते थी जो की वास्तुकला, विशालता, भव्यता आदि की दृष्टि से श्रेष्ठ थी। इन सात आश्चर्यों में से अब मात्र एक ही शेष है बाकी  सब समय के साथ इतिहास में दफन हो गए। आइए आज हम इन्ही प्राचीन सात आश्चर्यों के बारे में विस्तार से जानते है।

1. गीज़ा का विशाल पिरामिड, मिस्त्र (Great Pyramid of Giza, Egypt) : –

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गीज़ा का विशाल पिरामिड, विशव के सात प्राचीन अजूबो में सबसे पुराना है तथा यह एक मात्र प्राचीन अजूबा है जो समय की मार सहते हुए आज भी खड़ा है। यूँ तो मिस्र में कुल 138 पिरामिड है जिसमे से गीज़ा में तीन है। लेकिन गीज़ा में स्तिथ इस ग्रेट पिरामिड की गिनती ही विशव के प्राचीन सात अजूबों में होती है। यह पिरामिड 450 फुट ऊंचा है। 43 सदियों तक यह दुनिया की सबसे ऊंची संरचना रहा। इसका आधार 13 एकड़ में फैला है जो करीब 16 फुटबॉल मैदानों जितना है। यह 25 लाख चूनापत्थरों के खंडों से निर्मित है जिनमें से हर एक का वजन 2 से 30 टन के बीच है। ग्रेट पिरामिड को इतनी परिशुद्धता से बनाया गया है कि वर्तमान तकनीक ऐसी कृति को दोहरा नहीं सकती। कुछ साल पहले तक (लेसर किरणों से माप-जोख का उपकरण ईजाद होने तक) वैज्ञानिक इसकी सूक्ष्म सममिति (सिमट्रीज) का पता नहीं लगा पाये थे, प्रतिरूप बनाने की तो बात ही दूर! प्रमाण बताते हैं कि इसका निर्माण करीब 2560 वर्ष ईसा पूर्व मिस्र के शासक खुफु के चौथे वंश द्वारा अपनी कब्र के तौर पर कराया गया था। इसे बनाने में करीब 23 साल लगे।

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पिरामिड का प्रवेश द्वार

विशेषज्ञों के मुताबिक पिरामिड के बाहर पाषाण खंडों को इतनी कुशलता से तराशा और फिट किया गया है कि जोड़ों में एक ब्लेड भी नहीं घुसायी जा सकती। ग्रेट पिरामिड एक पाषाण-कंप्यूटर जैसा है। यदि इसके किनारों की लंबाई, ऊंचाई और कोणों को नापा जाय तो पृथ्वी से संबंधित भिन्न-भिन्न चीजों की सटीक गणना की जा सकती है। ग्रेट पिरामिड में पत्थरों का प्रयोग इस प्रकार किया गया है कि इसके भीतर का तापमान हमेशा स्थिर और पृथ्वी के औसत तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के बराबर रहता है। यदि इसके पत्थरों को 30 सेंटीमीटर मोटे टुकड़ों मे काट दिया जाए तो इनसे फ्रांस के चारों आ॓र एक मीटर ऊंची दीवार बन सकती है। ग्रेट पिरामिड ऑफ़ ग़िज़ा को पिरामिड ऑफ़ खुफु के नाम से भी जाना जाता है।

2. बेबीलोन के झूलते बागीचे (Hanging Gardens of Babylon) – :

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19 वि शताब्दी में बनी हुई एक पेंटिंग

हैंगिंग गार्डन्स ऑफ़ बेबीलोन का शुमार भी प्राचीन विशव के सात अजूबों में होता है तथा यह एक मात्र प्राचीन अजूबा है जिसकी सही लोकेशन आज तक निश्चित नहीं की जा सकी है लेकिन माना जाता है की यह प्राचीन बेबीलोन शहर में बना था जो आज इराक में अल-हिल्लह नामक स्थान के पास है। प्राचीन ग्रंथो के आधार पर यह उद्यान यहां के राजा नबूचड्नेजार द्वितीय (Nebuchadnezzar II) ने 600 ईसा पूर्व बनवाया था। ऐसा कहा जाता है की राजा ने यह उद्यान अपनी पत्नी अमीटिस (Amytis) को खुश करने के लिए बनवाया था क्योंकि वो बेबीलोन में अपने गृह नगर की हरी भरी पहाड़ियों और घाटियों को मिस करती थी। हैंगिंग गार्डन्स ऑफ़ बेबीलोन पर सदा से ही विशेषज्ञों की दो राय रही है कुछ इसके अस्तित्व को स्वीकारते कुछ इससे इंकार करते है क्योकि इसका विवरण मात्र तीन – चार प्राचीन किताबों में ही है तथा आज तक ऐसे किसी गार्डन के पुरातात्विक अवशेष भी नहीं मिले है। और यदि इसका वास्तव में अस्तित्व था तो यह कालांतर में भूकम्प जैसी किसी प्राकर्तिक आपदा के कारण नष्ट हो गया।

3. सिकन्दरिया का प्रकाश स्तम्भ, मिस्र (Lighthouse of Alexandria, Egypt) :-

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मिस्त्र में दुनियां का एक और अजूबा पाया जाता था और वह था सिकन्दरिया का प्रकाश स्तम्भ। समुद्री नाविकों को राह दिखाने के लिए इस प्रकाश स्तंभ का निर्माण एक छोटे से आइलैंड फराओ पर किया गया था। इसका निर्माण 280 ईस्वी पूर्व से 247 ईस्वी पूर्व के मध्य में हुआ था। यह प्राचीन विशव के अजूबों में तीसरी सबसे बड़ी संरचना थी जिसकी ऊँँचाई 393 से 450 फ़ीट के बीच मानी जाती है। 956 से 1323 के मध्य आए तीन बड़े भूकम्पों से यह इमारत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इस लाइट हाउस के पत्थरों का 15 वि शताब्दी में इसी जगह बने सिटाडेल ऑफ़ कैतबय (Citadel of Qaitbay) में इस्तेमाल कर लिया गया था। 1994 में फ़्रांस के विशेषज्ञों ने इस लाइट हाउस के अवशेषों की खोज की थी।

 History, Story & Information in Hindi
दूसरी शताब्दी के सिक्कों पर अंकित लाइट हाउस की तस्वीरें

4. ओलम्पिया में जियस की मूर्ति, ग्रीस (Statue of Zeus at Olympia, Greece) :-

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प्राचीन ओलम्पिया में स्तिथ ज़ीउस की मू्र्ति प्राचीन विश्व के सात आश्चर्यो में से एक थी । इस मूर्ति का निर्माण यूनानी मूर्तिकार फ़िडी्यास ने ईसा से 432 साल पहले किया था। इस मूर्ति को यूनान के ओलम्पिया में स्थित ज़ीउस के मंदिर (Temple of Zeus, Olympia, Greece) मे स्थापित किया गया था। इस मूर्ति में जियस को बैठी हुई अवस्था में दिखाया गया था।  मूर्ति की उंचाई 13 मीटर (42 फ़ीट) थी।  475 ईस्वी में लगी भयंकर आग की वजह से यह मूर्ति नष्ट हो गई थी। इसका वर्णन अब कुछ पुराने ग्रीक ग्रंथो और और तत्कालीन सिक्को पर अंकित है।

5. Maussollos at Halicarnassus – हैलिकारनेसस का मकबरा (तुर्की) :-

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हैलिकारनेसस में बने इस मकबरे की ऊँचाई 150 फीट थी। इसका निर्माण  623 ईसा पूर्व किया गया था। मौसोलस (Mausolus) नामक शासक के द्वारा बनवाई गई इस इमारत को उसकी याद के रुप में जाना जाता है। यह मक़बरा भी 12 वि सदी से 15 वि सदी के मध्य आए कई विनाशकारी भूकम्पों के कारण नष्ट हो गया था।

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खंडहर हो चूका मक़बरा

6. आर्तिमिस का मंदिर तुर्की (Temple of Artemis at Ephesus) :-

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गीक्र देवी अर्तिमिस (Greek goddess Artemis) को समर्पित इस मंदिर को बनने में 120 साल लगे थे। इसे टेम्पल ऑफ़ डायना के नाम से भी जाना जाता है। 401 ई. में पूर्ण तबाह होने से पहले भी यह मंदिर तीन बार नष्ट हो चूका था।  तीनो बार इसका पुनर्निर्माण करवाया गया था। जिसमे से एक बार सिकंदर ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था।

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7. रोड्‌स के कोलोसस की मूर्ति, ग्रीस (Colossus of Rhodes, Greece) :-

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ग्रीस (यूनान) की एक और वास्तु कला को विश्व के सात अजूबो में गिना जाता था।  रोड्‌स के कोलोसस की मूर्ति करीब 300 ईसा पूर्व निर्मित हुई थी। यह राजा रोड्‌स की साइप्रस के राजा पर मिली जीत की खुशी में बनाई गई थी। नष्ट होने से पहले इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग 30 मीटर थी जो इसे विश्व की सबसे बड़ी इमारत बनाती थी। 226 ईसा पूर्व में एक भूकंप की वजह से यह इमारत भी इतिहास में दफन हो गई।

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