Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

10 दिन क्यों मनाया जाता हैं गणेशोत्सव, देश की आज़ादी से जुड़ा है कारण

Posted on August 21, 2017August 26, 2017 by Pankaj Goyal

10 Din Kyon Manate Hai Ganeshotsav | भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। शिवपुराण के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था। विद्वानों के अनुसार पहले ये पर्व सिर्फ एक दिन ही मनाया जाता था, लेकिन वर्तमान में ये उत्सव 10 दिन मनाया जाता है और 11वे दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ इसका समापन होता है। सिर्फ 1 दिन मनाया जाने वाला पर्व 10 दिनों तक क्यों मनाया जाता है, इसके पीछे भी एक महत्वपूर्ण कारण छिपा है। आज हम आपको उसी के बारे में बता रहे हैं।

यह भी पढ़े– गणेश चतुर्थी को क्यों नहीं करने चाहिए चंद्र दर्शन ?

10 Din Kyon Manate Hai Ganeshotsav

हिंदू धर्म में शैव-वैष्णव जैसे कई उपासना पंथ हैं। इनमें गणपति की उपासना कनरे वालों को गाणपत्य कहा जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व हजारों साल से मनाया जा रहा है। जब भारत में पेशवाओं का शासन था, उस समय इस पर्व को भव्य रूप से मनाया जाने लगा। सवाई माधवराव पेशवा के शासन में पूना के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था।

जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने पेशवाओं के राज्य पर अधिकार कर लिया। इसके कारण गणेश उत्सव की भव्यता में कमी आने लगी, लेकिन ये परंपरा बनी रही। उस समय हिंदू भी अपने धर्म के प्रति उदासी हो गए थे। युवकों में अपने धर्म के प्रति नकारात्मकता और अंग्रेजी आचार-विचार के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था। उस समय महान क्रांतिकारी व जननेता लोकमान्य तिलक ने सोचा कि हिंदू धर्म को कैसे संगठित किया जाए?

लोकमान्य तिलक ने विचार किया कि श्रीगणेश ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो समाज के सभी स्तरों में पूजनीय हैं। गणेशोत्सव एक धार्मिक उत्सव होने के कारण अंग्रेज शासक भी इसमें दखल नहीं दे सकेंगे। इसी विचार के साथ लोकमान्य तिलक ने पूना में सन् 1893 में सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरूआत की। तिलक ने गणेशोत्सव को आजादी की लड़ाई के लिए एक प्रभावशाली साधन बनाया।

धीरे-धीरे पूरे महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव मनाया जाने लगा। ये वो दौर था जब अन्य धर्मों के लोग भी हिंदू धर्म पर हावी हो रहे थे। इस संबंध में लोकमान्य तिलक ने पूना में एक सभा आयोजित की। जिसमें ये तय किया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक गणेश उत्सव मनाया जाए। 10 दिनों के इस उत्सव में हिंदुओं को एकजुट करने व देश को आजाद करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर भी विचार किया जाता था।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –  भारत के अदभुत मंदिर

सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

भगवान गणेश से सम्बंधित अन्य लेख-

  • श्रीगणेश प्रश्नावली यंत्र – जानिए इस चमत्कारिक यंत्र से अपनी समस्याओं का समाधान
  • चतुर्थी तिथि को गणेशजी को प्रसन्न करने के उपाय (राशि अनुसार)
  • क्यों नहीं करने चाहिए भगवान गणेश की पीठ के दर्शन
  • पौराणिक कथा – भगवान गणेश को क्यों नहीं चढ़ाते तुलसी ?
  • भगवान श्रीगणेश के 8 अवतार

Related posts:

Hindu Calendar Jyeshta Month 2023 | हिंदी पंचांग ज्येष्ठ मास
Hanuman Jayanti Ki Shubhkamnae
Hindu Calendar Vaishakh Month 2023 | हिंदी पंचांग वैशाख मास 2023
Hindu Calendar Chaitra Month 2023 | हिंदी पंचांग चैत्र मास
चैत्र नवरात्रि 2023 - माँ दुर्गा का नाव पर होगा आगमन और मनुष्य पर होंगी विदा
शरीर का सार - आचार्य डा.अजय दीक्षित "अजय"
Hindu Calendar Margashirsha Month 2021 | हिंदी पंचांग मार्गशीर्ष मास
नरक चतुर्दशी पर यहां जलाएं 14 दीपक आएगी जीवन में खुशहाली
दीपावली 2021 - शुभ मुहूर्त
जानिये किन 6 देवों की पूजा होती है धनतेरस के दिन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/30/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme