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गुरु के बारे में ध्यान रखने योग्य बातें | मनु स्मृति

Posted on July 17, 2017 by Pankaj Goyal

Guru Ke Bare Me Dhyan Rakhne Yogy Baatein | हिंदू धर्म में गुरु को भगवान का दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अपने शिष्यों को नवजीवन प्रदान करता है और उन्हें अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु के महत्व को समझने के लिए ही प्रतिवर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। गुरु शब्द में ही गुरु की महिमा का वर्णन है। गु का अर्थ है अंधकार और रु का अर्थ है प्रकाश। इसलिए गुरु का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला यानी गुरु ही शिष्य को जीवन में सफलता के लिए उचित मार्गदर्शन करता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करता है, उसका जीवन सफल हो जाता है। महर्षि वेदव्यास ने भविष्योत्तर पुराण में गुरु पूर्णिमा के बारे में लिखा है-

यह भी पढ़े – गुरु कौन है | गुरु का महत्व क्या है

Guru Ke Bare Me Dhyan Rakhne Yogy Baatein

मम जन्मदिने सम्यक् पूजनीय: प्रयत्नत:।
आषाढ़ शुक्ल पक्षेतु पूर्णिमायां गुरौ तथा।।
पूजनीयो विशेषण वस्त्राभरणधेनुभि:।
फलपुष्पादिना सम्यगरत्नकांचन भोजनै:।।
दक्षिणाभि: सुपुष्टाभिर्मत्स्वरूप प्रपूजयेत।
एवं कृते त्वया विप्र मत्स्वरूपस्य दर्शनम्।।

अर्थात- आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मेरा जन्म दिवस है। इसे गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन पूरी श्रृद्धा के साथ गुरु को कपड़े, आभूषण, गाय, फल, फूल, रत्न, धन आदि समर्पित कर उनका पूजन करना चाहिए। ऐसा करने से गुरुदेव में मेरे ही स्वरूप के दर्शन होते हैं।

हिन्दू धर्म ग्रंथ मनु स्मृति में गुरु से संबंधित बहुत सी बातें बताई गई हैं जैसे- गुरु के सामने क्या करना चाहिए-क्या नहीं। आइए जानते है क्या है ये बातें –

1. शिष्य को गुरु के सामान आसान पर नहीं बैठना चाहिए। यदि गुरु जमीन पर बैठे हो तो शिष्य भी जमीन पर बैठ सकते हैं।

2. गुरु के सामने दीवार या अन्य किसी सहारे से टिक कर न बैठें, उनके सामने पांव फैला कर न बैठें।

3. गुरु के सामने कभी भी अश्लील शब्दों का प्रयोग नहीं करें। गुरु की हर बात माननी चाहिए।

4. जब भी गुरु से मिलने जाएं तो खाली हाथ न जाएं। कुछ न कुछ उपहार अवश्य साथ ले जाएं।

5. गुरु अगर कोई ज्ञान की बात बता रहे हों तो उसे मन लगाकर सुनें यानी आलस्य न करें।

6. गुरु के सामने सादे कपड़ें पहनकर ही जाना चाहिए। धन का प्रदर्शन गुरु के सामने नहीं करना चाहिए।

7. गुरु का नाम लेते समय उनके नाम के आगे परम आदरणीय या परमपूज्य जैसे शब्दों का उपयोग करना चाहिए।

8. स्वयं कभी गुरु की बुराई न करें। अगर कोई गुरु की बुराई कर रहा हो तो वहां से उठकर चले जाना चाहिए।

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