Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

नाभाग की कथा

Posted on February 22, 2017April 5, 2018 by Pankaj Goyal

मनुपुत्र नभग का पुत्र था नाभाग। जब वह कई वर्ष ब्रह्मचर्य का पालन कर लौटा, तब बड़े भाइयों ने उसे हिस्से में केवल पिता को दिया। सम्पत्ति तो उन्होंने पहले ही आपस में बाँट ली थी। उसने अपने पिता से कहा — पिता जी ! मेरे बड़े भाइयों ने हिस्से में मेरे लिए आपको ही दिया है।

यह भी पढ़े  – 8 पौराणिक बच्चों की कहानियां, जिन्होंने बचपन में ही कर दिए थे महान कार्य

Story of Nabhaga in Hindi, Katha, Kahani,

पिता ने कहा — बेटा! तुम उनकी बात न मानो। देखो, ये आंगिरस गोत्र ब्राह्मण बहुत बड़ा यज्ञ कर रहे हैं । परंतु वे प्रत्येक छठे दिन अपने कर्म में भूल कर बैठते हैं। तुम उनके पास जाकर उन्हें वैश्वदेव सम्बन्धी दो सूक्त बतला दो; जब वे स्वर्ग जाने लगेंगे, तब यज्ञ से बचा हुआ सारा धन तुम्हें दे देंगे।

उसने अपने पिता के आज्ञानुसार वैसा ही किया। उन ब्राह्मणों ने भी यज्ञ का बचा हुआ धन उसे दे दिया और वे स्वर्ग में चले गये।

जब नाभाग धन लेने लगा, तब उत्तर दिशा से एक काले रंग का पुरुष आया। उसने कहा — ‘इस यज्ञभूमि में जो कुछ बचा हुआ है, वह सब धन मेरा है ‘।

नाभाग ने कहा —‘ ऋषियों ने यह धन मुझे दिया है, इसलिए यह मेरा है ‘। इस पर उस पुरुष ने कहा —‘हमारे विवाद के विषय में तुम्हारे पिता से ही प्रश्न किया जाय ‘। तब नाभाग ने जाकर पिता से पूछा।

पिता ने कहा — ‘एक बार दक्षप्रजापति के यज्ञ में ऋषि लोग यह निश्चय कर चुके हैं कि यज्ञभूमि में जो कुछ बच रहता है, वह सब रुद्रदेव का हिस्सा है। इसलिए यह धन तो महादेव जी को ही मिलना चाहिए ‘। नाभाग ने जाकर उन काले रंग के पुरुष रुद्र भगवान को प्रणाम किया और कहा कि ‘प्रभो ! यज्ञभूमि की सभी वस्तुएँ आपकी हैं, मेरे पिता ने ऐसा ही कहा है। भगवन्! मुझसे अपराध हुआ, मैं सिर झुकाकर आपसे क्षमा माँगता हूँ । तब भगवान रुद्र ने कहा — ‘तुम्हारे पिता ने धर्म के अनुकूल निर्णय दिया है और तुमने भी मुझसे सत्य ही कहा है।तुम वेदों का अर्थ तो पहले से ही जानते हो।अब मैं तुम्हें सनातन ब्रह्म तत्व का ज्ञान देता हूँ ।

यहाँ यज्ञ में बचा हुआ मेरा जो अंश है, यह धन भी मैं तुम्हें ही दे रहा हूँ; तुम इसे स्वीकार करो। इतना कहकर भगवान रुद्र अन्तर्धान हो गये।

जो मनुष्य प्रातः और सायंकाल एकाग्रचित्त से इस आख्यान का स्मरण करता है, वह प्रतिभाशाली एवं वेदज्ञ तो होता ही है, साथ ही अपने स्वरूप को भी जान लेता है।

आचार्य, डा.अजय दीक्षित

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे सभी लेख आप नीचे TAG में Dr. Ajay Dixit पर क्लिक करके पढ़ सकते है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –  भारत के अदभुत मंदिर

सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

सम्बंधित लेख :- 

  • 16 पौराणिक कथाएं – पिता के वीर्य और माता के गर्भ के बिना जन्मे पौराणिक पात्रों की
  • महाभारत की 10 अनसुनी कहानियाँ
  • तेलंगाना में है हनुमान जी और उनकी पत्नी सुवर्चला का मंदिर
  • रहस्यमयी और अलौकिक निधिवन – यहाँ आज भी राधा संग रास रचाते है कृष्ण, जो भी देखता है हो जाता है पागल
  • पौराणिक कथा- क्यों काटा था काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवा शीश

Related posts:

स्कंद षष्ठी व्रत एवं पूजन विधि | महत्व | भगवान कार्तिकेय का जन्म कथा
मत्स्य जयंती की पौराणिक कथा
गुड़ी पड़वा क्यों, कैसे मनाते है | पौराणिक कथा
नारी गहने क्यों पहनती है? गहनों का महत्व
गोगाजी की जीवनी और गोगा नवमी की कथा
उनाकोटी - 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां, क्या है रहस्य
नागपंचमी की पौराणिक कथाएं
युधिष्ठर को पूर्ण आभास था, कि कलयुग में क्या होगा ?
वरुथिनी एकादशी का महत्व, व्रत विधि एवं व्रत कथा, वरुथिनी एकादशी
आखिर ! भगवान श्री कृष्ण का दामोदर नाम क्यों पडा ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/17/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme