Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

उर्वशी अप्सरा के पूर्व जन्म की कहानी

Posted on November 4, 2016April 5, 2018 by Pankaj Goyal

Urvashi Apsara ke Purva Janam Ki Kahani : प्राचीन काल में कश्मीर देश में देवव्रत नामक एक द्विज थे। उनके सुन्दर रूप वाली एक कन्या थी। जो मालिनी के नाम से प्रसिद्ध थी। द्विज ने उस कन्या का विवाह सत्यशील नामक सुन्दर बुद्धि मान द्विज के साथ कर दिया।

मालिनी कुमार्ग पर चलने वाली पुंश्चली होकर स्वच्छन्दतापूर्वक इधर-उधर रहने लगी। उसके घर में काम- काज के बहाने “उपपति ” रहा करता था । सभी जाति के मनुष्य जार के रूप में उसके यहाँ ठहरते थे । वह कभी पति की आज्ञा नही मानती थी। सदा पर पुरूष के साथ रंगरलियाँ मनाती थी ।

यह भी पढ़े- उर्वशी ने क्यों दिया अर्जुन को नपुंसक होने का श्राप ?

Urvashi apsara ke purva janam ki kahani, Hindi, Story,

इसी दोष के कारण उसके सब अंगों में कीडे पड गये थे। उन कीडों से उसकी नाक, जिह्वा और कानों का उच्छेद हो गया,स्तन तथा अंगुलियाँ गल गयीं। उसमें पंगुता आ गयी । इन सब क्लेशों के कारण उसकी मृत्यु हो गयी ।

तत्पश्चात् सौवीर देश में पद्मबन्धु नामक द्विज के घर में अनेक दुखों से घिरी हुई कुतिया हुई। उस समय भी उसके सिर में कीडे पड गये,और योनि में भी कीडे भरे रहते थे। इस तरह तीस वर्ष बीत गये।

एक दिन पद्मबन्धु का पुत्र गंगा में स्नान करके पवित्र हो भीगे वस्त्र से घर आया। उसने तुलसी की वेदी के पास जाकर अपने पैर धोये। दैव योग से वह कुतिया वेदी के नीचे सोई हुई थी। सूर्योदय से पहले का समय था,
ब्राह्मणकुमार के चरणोदक से वह नहा गयी और तत्काल उसके सारे पाप नष्ट हो गये । कुतिया को अपने पूर्व जन्म के दुराचरण पूर्ण वृतान्त याद आ गये। और वह वृतान्त कुतिया ने ब्राह्मण कुमार को सुनाये।

तब ब्राह्मण कुमार बोले- पति का अपराध करने वाली स्त्री सैकडों बार तिर्यग्योनि में और अरबों बार कीडे की योनि में जन्म लेती है।

यह सुनकर कुतिया बोली- दीनवत्सल! मैं आप के दरवाजे पर रहने वाली कुतिया हूँ । मुझ दीना के प्रति दया कीजिये। द्विजेन्द्र मैं आप को नमस्कार करती हूँ ।

कुतिया की विनती सुनकर ब्राह्मण कुमार के पिता पद्मबन्धु ने संकल्प किया- कुतिया ! ले, मैने द्वादशी का पुण्य तुझे दे दिया।

ब्राह्मण के इतना कहते ही कुतिया ने सहसा अपने प्राचीन शरीर का त्यागा कर दिया और दिव्य देह धारण कर दशों दिशाओं को प्रकाशित करती हुई ब्राह्मण की आग्या से स्वर्गलोक चली गई ।

वहाँ महान सुखों का उपभोग करके इस पृथ्वी पर भगवान् नर-नारायण के अंश से वही कुतिया “उर्वशी” नाम से प्रकट हुई।

धन्य हैं श्री हरि धन्य हैं उनकी माया ।
मायापति की माया में “अजय” ब्रहमांड समाया ।।
आप की माया का कोई भेद न पाया ।
नैनों मे है छबी आप की दिव्य करो मम काया ।।

||हरि हर शरणं गच्छामि ||

आचार्य, डा.अजय दीक्षित

डा. अजय दीक्षित जी द्वारा लिखे सभी लेख आप नीचे TAG में Dr. Ajay Dixit पर क्लिक करके पढ़ सकते है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –  भारत के अदभुत मंदिर

सम्पूर्ण पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

Other Similar Post :-

  • कर्ण में सूर्य देव के साथ दम्बोद्भव असुर का भी था अंश, जानिए एक अदभुत पौराणिक रहस्य
  • 16 पौराणिक कथाएं – पिता के वीर्य और माता के गर्भ के बिना जन्मे पौराणिक पात्रों की
  • कुरुक्षेत्र को ही क्यों चुना श्री कृष्ण ने महाभारत के युद्ध के लिए ?
  • कैसे हुआ बालि और सुग्रीव का जन्म तथा कैसे पड़ा ऋष्यमूक पर्वत का नाम
  • केवल लक्ष्मण ही कर सकते थे मेघनाद(इंद्रजीत) का वध, पर क्यों? जानिए रामायण का एक अनजान सत्य!

Related posts:

स्कंद षष्ठी व्रत एवं पूजन विधि | महत्व | भगवान कार्तिकेय का जन्म कथा
मत्स्य जयंती की पौराणिक कथा
गुड़ी पड़वा क्यों, कैसे मनाते है | पौराणिक कथा
नारी गहने क्यों पहनती है? गहनों का महत्व
गोगाजी की जीवनी और गोगा नवमी की कथा
उनाकोटी - 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां, क्या है रहस्य
नागपंचमी की पौराणिक कथाएं
युधिष्ठर को पूर्ण आभास था, कि कलयुग में क्या होगा ?
वरुथिनी एकादशी का महत्व, व्रत विधि एवं व्रत कथा, वरुथिनी एकादशी
आखिर ! भगवान श्री कृष्ण का दामोदर नाम क्यों पडा ।

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/17/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme