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जलाने और दफ़नाने के अलावा इन विचित्र तरीकों से भी होता है अंतिम संस्कार 

Posted on April 17, 2016October 20, 2017 by Pankaj Goyal

Amazing Funeral Traditions Story & History In Hindi : मौत के बाद हर धर्म में इंसानी शरीर का अंतिम संस्कार करने को कहा गया है। लगभग सभी धर्म और संप्रदाय में इसकी विधि अलग- अलग है। मुख्यत: पूरी दुनिया में मौत के बाद शरीर को खत्म करने के दो मुख्य तरीके हैं। पहला दफन करना दूसरा दाह संस्कार करना। इसके अलावा ममी बनाकर रखना, उबालकर कंकाल बनाना, गुफा में रखना, जल दाग देना, पशु-पक्षियों के लिए रख छोड़ना और शवों को खा जाने की भी परंपराएं हैं। आइए जानते हैं दुनिया के अलग-अलग धर्मों और समुदायों में अंतिम संस्कार के लिए अपनाए जाने वाले विचित्र तरीकों के बारे में ….

1. शव को खा जाने की परंपराAmazing Traditions Of Funeral In Hindi
सबसे विचित्र अंतिम संस्कार की परंपरा न्यू गिनी और ब्राजील के कुछ क्षेत्रों में है। इसके अलावा कुछ कुपोषित राष्ट्रों और जंगली क्षेत्रों में भी ये रिवाज है। इस रिवाज के अनुसार मृतक शरीर को खाया जाता है। इन क्षेत्रों में शव का दूसरी तरह से खात्मा करने की बजाए उन्हें खा लिया जाता है, क्योंकि इन लोगों को खाद्य सामग्री मुश्किल से मिलती है, हालांकि आजकल ये अमानवीय तरीका बहुत कम क्षेत्रों में रह गया है।

2. गुफा में रखना या पानी में बहा देनाAmazing Funeral Traditions Information in Hindi
पहले इसराइल और इराकी सभ्यता में लोग अपने मृतकों को शहर के बाहर बनाई गई एक गुफा में रख छोड़ते थे। गुफा को बाहर से पत्थर से बंद कर दिया जाता था। ईसा को जब सूली पर से उतारा गया तो उन्हें मृत समझकर उनका शव गुफा में रख दिया गया था। इतिहासकार मानते हैं कि यहूदियों में सबसे पहले दफनाए जाने या गुफा में रखे जाने की शुरुआत हुई। इंका सभ्यता के लोगों ने भी बर्फ और पहाड़ी क्षेत्रों में समतल जगह की कमी के चलते गुफाओं और खोह में अपने मृतकों का अंतिम स्थल बनाया। दक्षिण अमेरिका की कई सभ्यताओं में अधिक जलराशि व नदियों के प्रचुर बहाव वाले क्षेत्रों में मृतकों को जल में प्रवाहित कर उनका अंतिम संस्कार किया जाता रहा है।

3.गला घोंटने की परंपराAmazing Funeral Traditions Story & History n Hindi
फिजी के दक्षिण प्रशांत द्वीप पर प्राचीन भारत की सती प्रथा से मिलती-जुलती एक परंपरा है। यदि इस क्षेत्र के हिसाब से पारंपरिक अंतिम संस्कार किया जाए तो मरने वाले को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता है। उसके साथ किसी एक प्रिय व्यक्ति को भी मरना पड़ता है और वहां इसके लिए गला घोटे जाने की परंपरा है। मान्यता है कि ऐसा करने से मरने वाले को तकलीफ नहीं होती है।

4. पारसी अंतिम संस्कारAmazing Funeral Traditions Story & History n Hindi
पारसियों में आज भी मृतकों को न तो दफनाया जाता है और न ही जलाया जाता है। पहले वे लोग शव को चील घर में रख देते थे ताकि उनका मृत परिजन गिद्धों व चीलों का भोजन बन जाए। आधुनिक युग में यह संभव नहीं और गिद्धों की संख्या भी तेजी से घट रही है। इसलिए उन्होंने नया उपाय ढूंढ लिया है। वे शव को कब्रिस्तान में रख देते हैं। जहां पर सौर ऊर्जा की विशालकाय प्लेटें लगी हैं, जिसके तेज से शव धीरे-धीरे जलकर भस्म हो जाता है।

5. जलाने की परंपरा25
जिन क्षेत्रों में सघन वन पाए जाते हैं। उन क्षेत्रों में मौत के बाद शवों को जलाने की परंपरा है। मुख्यत: हिंदू धर्म में शवों को जलाकर पंच तत्व में विलीन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। जबकि कई अन्य धर्मों में शवों को जलाना एक गलत कृत्य माना गया है। हिंदू मान्यता के अनुसार शव से तुरंत मोह छोड़कर उसे अग्रि के हवाले कर देना सबसे बेहतर है।

6. ताबूत को ऊंचे चट्टान पर लटकाने की परंपरा26
चीनी राजवंशों में शवों को ताबूत में रखकर ऊंची चट्टानों पर लटकाने की परंपरा थी। वे मानते थे कि इस तरह से ताबूत को लटकाने से मृत व्यक्ति स्वर्ग के करीब पहुंच जाता है और उनकी आत्माएं स्वतंत्रता से चट्टानों के चारों तरफ घूम सकती हैं।

7. व्रजयान बौद्ध संप्रदाय की परंपरा27
पूरी दुनिया में व्रजयान बौद्ध संप्रदाय के लोग बहुत अनोखे तरीके से अंतिम संस्कार करते हैं। इस क्रिया में पहले शव को शमशान ले जाते है। यह एक ऊंचाई वाले इलाके में होता है। वहां पर लामा ( बौद्ध भिक्षु ) धूप बत्ती जलाकर उस शव कि पूजा करता है। फिर एक शमशान का कर्मचारी उस शव के छोटे छोटे टुकड़े करता है।

दूसरा कर्मचारी उन टुकड़ों को जौ के आटे के घोल में डुबोता है। फिर वो टुकड़े गिद्धों को खाने के लिए डाल दिए जाते है। जब गिद्ध सारा मांस खाकर चले जाते हैं। उसके बाद हड्डियों को इकठ्ठा करके उनका चुरा किया जाता है और उनको ही जौ के आट और याक के दूध से बने मक्खन के घोल में डुबो कर कौओ और बाज को खिला दिया जाता है।

8. ममी बनाने का परंपरा28
मिस्र के गिजा परामिडों में ममी बनाकर रखे गए शवों के कारण फराओ के साम्राज्य को दुनियाभर में आज भी एक रहस्य माना जाता है। यहां मिले शव लगभग 3500 साल पुराने माने जाते हैं। कहा जाता है कि मिस्त्र में यह सोच कर शवों को ममी बनाकर दफना दिया जाता था, कि एक न एक दिन वे फिर जिंदा हो जाएंगे। ऐसा सिर्फ मिस्र में ही नहीं बल्कि भारत, श्रीलंका, चीन, तिब्बत और थाइलैंड में भी किया जाता रहा है। चीन और तिब्बत में आज भी कई हजार वर्ष पुरानी प्राचीन ममियां मौजूद है।

9. दफनाने की परंपरा29
दफनाने की परंपरा की शुरुआत भारत में वैदिक काल से हुई तब संतों को समाधि दी जाती थी। आज भी हिंदू साधु समाज संतों का दाह संस्कार नहीं करता। उनकी समाधि ही दी जाती है। इस्लाम बहुल देश जैसे ईरान, अरब आदि में मृतकों को जमीन में दफनाने का तरीका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ईसाई धर्म में भी मरने के बाद दफन करने का ही रिवाज़ है। गौरतलब है कि भारत में कुछ संप्रदाय जैसे बैरागी, नाथ और गोसाईं समाज आज भी अपने लिए एक अलग समाधि स्थल के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। मजबूरन उन्हें अपने मृतकों को अपनी-अपनी निजी भूमि में समाधि देना पड़ती है।

अन्य विचित्र परम्पराएँ
  • भारत की 10 अनोखी परम्परा और मान्यता
  • काशी के मणिकर्णिका शमशान घाट पर जलती चिताओं के पास पूरी रात नाचती हैं सेक्स वर्कर, आखिर क्यों ?
  • 8 अजीबोगरीब भारतीय मान्यताएं- आस्था या अन्धविश्वास?
  • स्काई बुरिअल(Sky Burial) – एक विभित्स अंतिम संस्कार किर्या – लाश के छोटे छोटे टुकड़े कर खिला देते हैं गिद्धों को
  • विचित्र किन्तु सत्य – अंगा आदिवासी जो लाशों को ममी बनाकर रखते है सुरक्षीत तथा बडे उत्सवो में शामील करते है पूर्वजो की ममी क़ो

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