Ajab Gajab

Status, Shayari, Message, Vrat Katha, Pauranik Katha, Jyotish, News, Hindi Story, Religion, Health, Poem, Jokes, Kavita, Geet, Gazal, Wishes, SMS, Interesting Facts

Menu
  • Pauranik Katha
  • Jyotish
  • Quotes
  • Shayari
  • Amazing India
  • Self Improvment
  • Health
  • Temple
  • Bizarre
Menu

इस मंदिर में है अदभुत ‘शालिग्राम’, पिछले 200 सालों से बढ़ रहा है आकार

Posted on October 22, 2015July 11, 2016 by Pankaj Goyal

Mysterious Shaligram in Bagaha, Bihar : आज हम बिहार के एक मंदिर में स्थापित ऐसे शालिग्राम पिंडी के बारे में बता रहे हैं, जिसका आकार पहेली बना हुआ है। ये पिंडी, पश्चिम चंपारण के बगहा पुलिस जिला स्थित पकीबावली मंदिर के गर्भगृह में है। कहते हैं कि आज से 200 साल पहले नेपाल नरेश जंग बहादुर ने इसे भेंट किया था।

Mysterious Shaligram in Bagaha, Bihar, Hindi, History, Story, Kahani, Information,
कलश पर रखा रहस्यमयी शालिग्राम की पिंडी।

तब इस शालिग्राम पिंडी का आकार मटर के दाने से कुछ बड़ा था। इसे लाकर यहां बावली किनारे मंदिर के गर्भगृह में रख दिया गया। आज पिंडी का आकार नारियल से दो गुना बड़ा है। अभी भी इसका आकार लगातार बढ़ ही रहा है। यहां के लोग इसे ज़िंदा शालिग्राम मानते हैं। वैज्ञानिकों ने भी पिंडी के आकार बढ़ने को लेकर स्टडी की, पर आकार बढ़ने के पीछे का रहस्य नहीं खुल पाया।

बावली के किनारे हैं मंदिर, बिड़ला समूह ने दिखाई थी रूचि

मंदिर के किनारों पर एक बावली है। मंदिर की ख्याति के चलते बिड़ला समूह इस मंदिर का जीर्णोद्धार कर विकास करना चाहता था। लेकिन तब मंदिर बनाने वाले हलवाइयों के परिजनों ने बिड़ला के प्रस्ताव का विरोध कर दिया। बावली के किनारों पर और भी मंदिर हैं। मंदिर काफी पुराने हो चुके हैं। शालिग्राम की पिंडी के दर्शन के लिए दूर-दूर तक के श्रद्धालु यहां आते हैं।

mysterious-temple_1445422-1-300x261
ऐसे पहुंचा भारत

200 साल पहले तत्कालीन नेपाल नरेश जंग बहादुर अंग्रेजी सरकार के आदेश पर किसी जागीरदार को गिरफ्तार करने निकले थें। तब उन्होंने बगहा पुलिस जिला में ही अपना कैंप लगाया था। उस वक्त यहां एक हलवाई नेपाल नरेश के ठहरने की सूचना पाकर, थाल में मिठाई लेकर उनके पास पहुंचा। राजा हलवाई की मेहमाननवाजी से काफी खुश हुए और उसे नेपाल आने का न्यौता दे दिया। बाद में हलवाई के नेपाल पहुंचने पर उसका भव्य स्वागत हुआ। उसी दौरान वहां के राजपुरोहित ने उसे एक छोटा सा ‘शालिग्राम’ भेंट किया था। हलवाई ने शालिग्राम लाकर एक विशाल मंदिर बनाकर उसे उसमें स्थापित कर दिया। 200 साल में शालिग्राम की पिंडी का आकार कई गुना बढ़ गया।

क्या होता है शालिग्राम

शालिग्राम दुर्लभ किस्म के चिकने और आकार में बहुत छोटे पत्थर होते हैं। ये शंख की तरह चमकीले होते हैं। शालिग्राम को भगवान विष्णु का रूप माना है। वैष्णव इनकी पूजा करते हैं। ये रंग में भूरे, सफ़ेद या फिर नीले हो सकते हैं। आमतौर पर शालिग्राम नेपाल के काली गंडकी नदी के तट पर पाए जाते हैं। कहते हैं कि एक पूर्ण शालिग्राम में भगवाण विष्णु के चक्र की आकृति अंकित होती है।

भारत के मंदिरों के बारे में यहाँ पढ़े –   भारत के अदभुत मंदिर
पौराणिक कहानियाँ यहाँ पढ़े – पौराणिक कथाओं का विशाल संग्रह

Other Similar Posts-

  • चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना- यह मंदिर कहलाता था तांत्रिक विश्वविद्यालय, होते थे तांत्रिक अनुष्ठान
  • दैवीय चमत्कार- 50 लाख लीटर पानी से भी नहीं भरा शीतला माता के मंदिर में स्तिथ ये छोटा सा घडा़, वैज्ञानिक भी हैरान
  • चमत्कारिक कनिपक्कम गणपति मंदिर (आंध्रप्रदेश) – लगातार बढ़ा रहा है मूर्ति का आकार
  • असीरगढ़ का किला – श्रीकृष्ण के श्राप के कारण यहां आज भी भटकते हैं अश्वत्थामा, किले के शिवमंदिर में प्रतिदिन करते है पूजा
  • लोहार्गल – यहां पानी में गल गए थे पांडवों के अस्त्र-शस्त्र, मिली थी परिजनों की हत्या के पाप से मुक्ति

Hindi, Mysterious, Rahasyamayi, Shaligram, Temple, History, Story, Kahani, Bihar,

Related posts:

उनाकोटी - 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां, क्या है रहस्य
जटोली शिव मंदिर - पत्थरों को थपथपाने पर आती है डमरू की आवाज
विश्व का एकमात्र अर्धनारीश्वर शिवलिंग, होता है शिव और मां पार्वती मिलन, Ardhanarishwar Shivling of K...
क्वारैंटाइन मंदिर राजस्थान, राजस्थान में एक ऐसा मंदिर जहां पार्वतीजी होम क्वारैंटाइन में और महादेव क...
गड़ियाघाट माता मंदिर - माता के इस मंदिर में नदी के पानी से जलती है अखंड ज्योत
सिंहाचलम मंदिर - यहाँ पर वराह और नृसिंह अवतार का सयुंक्त रूप विराजित है माँ लक्ष्मी के साथ
आदि विनायक मंदिर - इस एक मात्र मंदिर में इंसान के चेहरे में है श्रीगणेश की मूर्ति
12 ज्योतिर्लिंग और उनसे जुडी ख़ास बातें
अष्टभुजा धाम | Ashtbhuja Dham | इस मंदिर में बिना सिर वाली मूर्तियों की होती है पूजा
रामदेवरा मंदिर, रूणिचा धाम- बाबा रामदेव (रामापीर) का समाधी स्थल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Daily Horoscope

04/22/26

Pages

  • AdTest
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Guest Post & Sponsored Post
  • Privacy Policy
©2026 Ajab Gajab | Design: Newspaperly WordPress Theme