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मंडोर- यहां हुआ था रावण और मंदोदरी का विवाह

Posted on April 17, 2015August 22, 2016 by Pankaj Goyal

Ravan Mandodari Marriage (Vivah) Story in Hindi : ऐसी लोक मान्यता है की लंकापति रावण और मंदोदरी का विवाह जोधपुर के मंडोर में हुआ था। यहां के लोग मानते हैं कि मंडोर रेलवे स्टेशन के पास की पहाड़ी पर वापिका के पास जो गणेश और अष्ठ मातृकाओं का फलक है वह रावण की चंवरी है। (मारवाड़ी में चंवरी उस जगह को कहते हैं जहां युगल अपनी शादी के फेरे लेता है) । जोधपुर शहर में ही लंकाधिपति रावण का मंदिर भी है। यहां के दवे, गोधा और श्रीमाली समाज के लोग रावण की पूजा-अर्चना करते हैं। इनकी मान्यता हैं कि जोधपुर रावण का ससुराल था तथा रावण के वध के बाद रावण के वंशज यहां आकर बस गए थे। ये लोग खुद को रावण का वंशज मानते हैं।

Ravan Mandodari Marriage (Vivah) Story in Hindi
जोधपुर के मंडोर के निकट पहाड़ी पर रावण की चंवरी।

वाल्मीकी रामायण के अनुसार मयासुर दानवों का विश्वकर्मा था। उसने घोर तपस्या के बल पर प्रजापति ब्रह्मा से यह वरदान हासिल किया था। लोक कथाओं के अनुसार थार के रेगिस्तान के बीच में अपनी प्रिय अप्सरा हेमा के लिए मयासुर ने माया के बल पर मंडोर जैसे सुंदर स्थान का निर्माण किया था। मंडोर नगर की पहाड़ी पर स्थित एक वापिका के पार्श्व में वेदी के अवशेष अभी भी विद्यमान हैं। इस वेदी को रावण की चंवरी कहा जाता है।

 

Ravan Mandodari Vivah ki kahani

मयासुर और हेमा की अन्यंत सुन्दर कन्या हुई, इसका नाम मंदोदरी रखा गया। ऐसी मान्यता है कि मंदोदरी के नाम पर ही इस क्षेत्र का नाम मंडोर पड़ा। कुछ समय बाद इन्द्र ने किसी बात पर कुपित होकर मयासुर को वहां से भगा दिया। ऐसे में मंडूक नाम के ऋषि ने मंदोदरी का पालन पोषण किया। मंडूक ऋषि का उल्लेख रामायण में भी मिलता है।

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रावण पर जाकर पूरी हुई मंदोदरी के वर की खोज

मंदोदरी ने जब वय संधि पार कर ली थी। उस समय तक अप्सरा हेमा मयासुर का त्याग कर स्वर्ग लोक जा चुकी थी और वह बहुत विपन्न अवस्था में था। तब मयासुर रावण के पास पहुंचा और अपनी पुत्री के विवाह के लिए योग्य वर की खोज करने में मदद मांगी। उचित वर नहीं मिलने से निराश मयासुर रावण का वैभव व शक्ति देख बहुत प्रसन्न हुआ और उसने आखिरकार रावण के सम्मुख अपनी गुणवान व रूपवान पुत्री मंदोदरी से विवाह का प्रस्ताव रखा। मयासुर ने रावण से कहा कि यह मेरी पुत्री मंदोदरी है। जिसे हेमा अप्सरा ने अपने गर्भ में धारण किया था। इसे आप अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें। रावण ने मयासुर की बात मान ली और मंडोर में मंदोदरी के साथ उसका विवाह हुआ।

Mandore, Jodhpur, Rajasthan Ravan Mandodri Marriage

बहुत सुंदर थी मंदोदरी

रावण की पत्नी मंदोदरी बहुत सुंदर थी। सीता की खोज में लंका गए हनुमान ने वहां पर मंदोदरी को देख यही अनुमान लगाया था कि यही सीता है। आभूषणों से सुशोभित सुंदर मंदोदरी को एक शैय्या पर लेटे देख उन्हें एक बार भ्रम हो गया कि हो न हो यहीं सीता मैय्या है। लेकिन उनका यह अनुमान गलत साबित हुआ। इसी से जाहिर है कि मंदोदरी भी अत्यंत रूपवान रही होगी तभी उसे देख हनुमान तक धोखा खा गए।

Mandore, Jodhpur, Rajasthan

अब रह गए हैं सिर्फ अवशेष

सदियों से वक्त के थपेड़ों को झेल रही मंडोर के निकट की इस पहाड़ी पर अब सिर्फ अवशेष रह गए है। यहां बचे खंडहर बता रहे है कि कभी यहां पर भव्य इमारत रही होगी। ऐसी मान्यता है कि यहां पर एक भव्य महल हुआ करता था। इनके सार-संभाल के प्रयास अवश्य हुए लेकिन पूरी शिद्दत के साथ नहीं हो पाए। यही कारण है कि कई अवशेषों को लोगों ने खंडित कर दिया तो ऐतिहासिक महत्व की कई धरोहरों को लोग उठा कर ले गए। हालांकि अब बी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पर आते है और कल्पना लोक में खो जाते है कि कैसे अपनी युवावस्था में महाशक्तिशाली रावण ने यहां पर मंदोदरी के साथ फेरे लिए होंगे।

Post Credit- Sunil Choudhary via bhaskar.com

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Tag- Hindi, Pauranik, Mythological, Ravan, Mandodri, Vivah, Marriage, Mandore, Jodhpur, Rajasthan, Ramayan, Worship of Ravan,

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