Hum Dekhte Rahe Poem In Hindi – मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’ राजसमंद द्वारा रचित रचना ‘हम देखते रहें’

‘हम देखते रहें’ (Hum Dekhte Rahe)
झुकी हुई पलकें हम देखते रहें|
सिर झुका के चले हम देखते रहें|1|
जुल्फें बिखरी हवा ने चेहरे पे आ गई|
चांद पर बादलों का डेरा हम देखते रहें|2|
नीले परिधान पर मटमैला दुपट्टा|
चेहरे को ढकता रहा हम देखते रहें|3|
नीलम मोती की अंगुठी पहनी जो आपने|
जैसे झील में मीन हम देखते रहें|4|
मन के सारे भाव मुखड़े पे आ गये|
मन की मजबूरी हम देखते रहें|5|
मनीष नंदवाना ‘चित्रकार’
राजसमंद
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